मंगलवार, 14 सितंबर 2010

भाई सिर्फ इतना ही कहूँगा. जड़ता और कट्टरता उधार भी है इधर भी है. मेरा परिवार भी विभाजन की त्रासदी झेल चुका है. सब कुछ वहीँ छोड़ कर आना पड़ा था. मेरे कई परिजन आज भी पाकिस्तान में हैं और खुश हैं, समृद्ध हैं हमें हिन्दू होते हुए भी आपके तथा कथित हिन्दुओं ने हमेशा शरणार्थी कहकर प्रताड़ित किया और आज भी कर रहे हैं. दोयम दर्जे का नीचतापूर्ण व्यावहार. फिर भी यही कहूँगा आज भी पाकिस्तान में हिन्दू हैं, और भारत में मुसलमान, तो इस लिए की कुछ इंसानियत लोगों में बाकि है
हमारे माता-पिता बताते हैं की उस समय कैसे मुसलमानों ने हिन्दुओं को अपने घरों में पनाह दी, उनकी जान और इज्जत की हिफाजत कीभारत में हिन्दुओं ने भी यही किया
वो कमीने दहशत-गर्द तो कोई और ही थे जो दोनों कौमों में छिपे बेठे थेऔर बेगुनाह मासूमों का खून बहा रहे थे
आपतो किराये का हिंदुत्व और उसकी पीड़ा लेकर लड़ने को तैयार रहतें हैंहम तो भुक्त भोगी हैं, हम जानते हैं सचाई क्या है
इस लिए मासूमों को बरगलाना छोडिये, सत्ता की भूख त्यागिये और इस देश को खुली साँसें लेकर बढ़ने-विकसित होने दीजिये. हवाओं में जहर घोलने की कोशिस मत कीजिये
बस एक बात और---- लोग अब समझने लगे हैं कि किसकी क्या मंसा है. इस लिए सब लोगों के विवेक पर छोड़ दीजिये. वे भी अन्न खाते हैं भाई साहब. और जानते है कि सच क्या है.
मैं समजता हूँ कि अब इस विषय में संवाद कि और जरुरत नहीं है.

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