शुक्रवार, 10 सितंबर 2010

भगवा आतंकवाद के बरक्श बाबा नागार्जुन!

भगवा आतंकवाद के बरक्स बाबा नागार्जुन!

अपनी "शपथ" कविता में बाबा ने लिखा है-

"कांटे कहाँ, रोड़े हैं
कहाँ गढ़ा है, कहाँ रेत है
सभी साफ हो गया आज, जनता सचेत है
कोटि-कोटि कंठों से निसृत सुन-सुनकर आक्रोश
भगवाध्वजधारी दैत्यों के उड़े जा रहे होश।"

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