मंगलवार, 22 मार्च 2011

भगत सिंह ने एक बार बाबा सोहनसिंह भकना से कहा था-
"हमारी पुरानी विरासत के दो पक्ष होते हैं, एक सांस्कृतिक और दूसरा मिथिहासिकमैं सांस्कृतिक गुणों, जैसे- देश-सेवा, बलिदान, विश्वासों पर अटल रहना- को पूरी सच्चाई से अपनाकर आगे बढ़ने की कोशिश में हूँ, लेकिन मिथिहासिक विचारों को, जोकि पुराने समय की समझ के अनुरूप हैं, वैसे-का-वैसा मानाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हूँ, क्योंकि विज्ञानं ने ज्ञान में खूब वृद्धि की है और वैज्ञानिक विचार अपनाकर ही भविष्य की समस्याएं हल हो सकती हैं। "

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें